बसेड़ा में मनाई गयी मुंशी प्रेमचंद जयंती

( रचना पाठ और लघु पत्रिका प्रदर्शनी का आयोजन )

राजस्थान के छोटी सादड़ी तहसील क्षेत्र में स्थित राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बसेड़ा में बीते माह स्थापित हिंदी क्लब ने इकतीस जुलाई को अपना पहला साहित्यिक आयोजन मुंशी प्रेमचंद जयंती के रूप में मनाया.

बसेड़ा हिंदी क्लब के सूत्रधार चेनराम मीणा और सह संयोजक आतीश मीणा ने बताया कि हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रगतिशील लेखक कथा सम्राट प्रेमचंद को याद करते हुए छात्र अर्जुन मेघवाल और गुणवंत मेघवाल ने कहा कि पूरी सचाई और बेबाकी के साथ लिखने वालों की सदैव कमी रही है ऐसे में यथार्थ को ठीक से उकेरने वाले प्रेमचंद के लेखन में हमें गरीब, गाँव और खेतिहर मजदूर सहित किसान सदैव अनुभव हुए हैं. प्र्मेचंद ने वंचितों और स्त्री पक्ष के संघर्ष को बहुत गहराई से महसूसने के बाद गोदान और प्रेमाश्रम सहित दर्जनभर उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियां रची.कफ़न और पूस की रात जैसी कहानियां इसी पीड़ा की उपज है. इसी तरह छात्रा बबली धोबी, खुशांकी तिवारी, अलका लौहार, टमा सेन, काजल कहार, ममता आंजना, सोनिया मीणा में से किसी ने हाल में पढ़ी साहित्यिक पुस्तकों के अनुभव साझा किए तो किसी ने सफ़दर हाश्मी, विनय महाजन, दुष्यंत कुमार, अदम गोंडवी, पाश के लिखें जनगीतों का सरस पाठ किया.

इस अवसर पर विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक बी.एल.मीणा और जगदीश सेंगर के निर्देशन में एक लघु पत्रिका प्रदर्शनी भी लगाई जिसे सभी ने बहुत सराहा. दर्शकों ने देशभर से निकलने वाले इन प्रकाशनों की बारीकी से जानकारी भी ली. देहाती क्षेत्र में यह प्रदर्शनी एकदम नयी तरह का आकर्षण बन पड़ी. प्रदर्शनी में हिन्दी भाषा की पच्चीस से भी अधिक पत्रिकाओं के नवीनतम अंक प्रस्तुत किए गए.

आयोजन में बतौर अतिथि राउप्रावि हडमतिया कुण्डाल के संस्था प्रधान बिरदी चंद सेन और महीनगर संस्था प्रधान निर्मला पाटीदार ने शिरकत की. इतिहास व्याख्याता प्रेमा राम कुमावत के सानिध्य में छात्रा पूजा प्रजापत, ममता आंजना, दीपक धोबी और कोमल आंजना ने मुंशी प्रेमचंद केन्द्रित एक कॉलाज रचा जिसमें उनके जीवन और कृतित्व को पोस्टर्स सहित मांडनों से सझाया गया। कॉलाज को भी सभी ने बहुत सराहा. अतिथियों द्वारा इस बीच बसेड़ा हिंदी क्लब के दस नए और रुचिशील विद्यार्थी सदस्यों को कहानियों की पुस्तकें वितरित की गयी.

इस मौके पर कार्यवाहक संस्था प्रधान प्रभुदयाल कूड़ी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वक़्त की रफ़्तार के हिसाब से स्कूली और खासकर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं के विकास पर ज्यादा ध्यान देना होगा. प्रतिभा सभी के भीतर होती है बस उन्हें मौक़ा मिलने की देरी है. विद्यालय की साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियाँ सभी के लिए खुला मंच हैं इनका भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए। आयोजन का संचालन क्लब के संयोजक माणिक ने किया. अंत में आभार छात्र पुष्कर आंजना और कारू लाल आंजना ने दिया.

माणिक
संयोजक,बसेड़ा हिंदी क्लब

Categories: कला एवम् साहित्य

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